वर्षगाँठ की बधाई सैनिक स्कूल तिलैया!

फ़ंडामेंटल विजन ये था कि हर बच्चे में ख़ूबी होती है, उसको तलाशने और तराशने की ज़रूरत होती है। आपका एकेडमिक्स बहुत खराब हो तभी आपको आपके सीनियर और शिक्षक समझाएँगे, डाँटेंगे कि न्यूनतम स्तर तक होना भी ज़रूरी है। बाकी समय एक औसत बच्चे को भी कोई प्रेशर नहीं होता। उनके माता-पिता देते हों, तो वो अलग बात है।

बिहार छात्र-दुर्दशा पर आश्चर्य क्यों?

ग़रीबी के कारण सरकारी स्कूलों में अटके बच्चे, जहाँ के शिक्षकों को सैलरी आठ महीने में मिलती है, क्या पढ़ाई करेंगे? उनके सिर्फ फ़ॉर्म भरे जाते हैं।

मुद्दा नंबर चार: कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में नशाखोरी और गाँजा पीकर क्रिएटिव बनते छात्र

हर परेशान आदमी नहीं पीता, लेकिन हर परेशान छात्र को सिगरेट पकड़ाने वाले दस दोस्त लाइटर लेकर खड़े रहते हैं। ये एक तरह से कन्वर्जन टाइप का काम है। ये कम्यूनिटी बनाने का काम है कि अब ये भी हमारे ग्रुप में आ गया।

मुद्दा नंबर तीन: ऐसी शिक्षा व्यवस्था जहाँ स्टूडेण्ट काउन्सलिंग है ही नहीं!

तर्क है कि माँ-बाप अपने अनुभव से ये जानते हैं कि उनके लिए क्या ठीक रहेगा। अगर ऐसा है तो फिर उस प्रोसेस का हिस्सा छात्रों को भी तो बनाईए कि वो भी कह सके उसकी गणित में रूचि है या क्रिकेट में।

पंजाब यूनिवर्सिटी: फ़ीस बढ़ाना ठीक है या गलत

पंजाब विश्वविद्यालय में कई पाठ्यक्रमों की फ़ीस 5,000 से 50,000 हो गई है। कई पाठ्यक्रमों में सीधा 1100% तक की वृद्धि है। ये बात भी यही है कि पत्रकारिता में मास्टर्स करने की फ़ीस 30,000, बी फ़ार्मा के लिए 50,000, डेंटल के लिए 1,50,000 बहुत ज़्यादा नहीं है। साथ ही ये बात भी कि ये […]