आसान है गाली देना देश, सरकार और समाज को

संविधान के अधिकारों पर अपना हक़ जताकर हो हल्ला करते हैं पर कर्तव्य भूल जाते हैं, वैसे देश के लिए अड़सठ साल का गणतंत्र हो जाना अपने आप में एक मिसाल ही है।

असम में भाजपा की सरकार और बुद्धिजीवियों का कोरस में विधवा-विलाप

आपका ‘इंटेलेक्ट’ अब बस ‘मोलेस्ट’ होने के लिए ही बचा है। आपका सारा ज्ञान अब किसी तरह कुछ भी सरकार विरोधी बोलकर दाँत निपोड़ कर हँस लेना है। और अपने कन्विनिएंट समय तथा लॉजिक के अनुसार जादवपुर, एसएफआई के विद्यार्थी नेता द्वारा किए ख़ुलासे आदि को बिल्कुल भी ध्यान ना देकर कुछ और बात छेड़ देनी है।