पुस्तक (साहित्य की विधाओं की) समीक्षा कैसे करें

समीक्षा कैसे करें जो कि किसी को पढ़ने या न पढ़ने के लिखे प्रेरित कर सके। क्या इसका कोई तरीक़ा है? कोई परिपाटी नहीं है जो कि बिन्दुवार रूप से अनुसरण किया जाना चाहिए। मतलब कोई फ़िक्स पैटर्न नहीं है, लेकिन कुछ बिन्दु हैं जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए।

श्श्शऽऽऽ… हिन्दी के नवोदित साहित्यकार सो रहे हैं!

हमारे दौर के साहित्यकार अंदर से मरे हुए हैं, नाम के भूखे हैं, और हीनभावना से ग्रस्त हैं। इनकी लेखनी को दीमक चाट गया है, और दिमाग तो गलकर कान के रास्ते रिस-रिस कर बह ही चुका है।

पत्र: कहानी क्या है, निहायत ज़रूरियात क्या हैं, आपकी पहचान क्या है

आपके मन में जो भी चल रहा हो, आपने अपने अनुभवों को जिस भी परिस्थिति में कल्पनाशीलता से रखा है, वही अभिव्यक्ति है। उसमें मसाला मत डालिए। मसाला हमेशा फ़ैक्ट्री से आता है और रेसिपी में इस्तेमाल होता है। आपके पास जो मसाला है, वो सबके पास है।

साहित्य और समाज: शुद्धता, व्याकरण, अच्छी भाषा, बुरी भाषा

साहित्य अपने आप में इतिहास है, मनोविज्ञान है, पत्रकारिता है, धर्मग्रंथ है। इस बात को समझिए और भाषा को सिर्फ कम्यूनिकेशन का माध्यम मत बनाईए, ये उससे कहीं ज़्यादा बड़ी बात है।

पुस्तक मेले से: हिन्दी के लेखकों से सवाल-जवाब

हममें से सब अभी भी कॉलेज का कैनवस लिए उसी में पात्रों को घुमा रहे हैं। उसमें संवाद में कोई गहराई नहीं मिलती, ना ही उसके पात्र कभी उन द्वंद्वों में पड़ते हैं जिसका समाधान क्लिष्ट हो।

लोकसभा टीवी पर ‘नई हिन्दी, नए लेखक’ कार्यक्रम का विडियो

स्वच्छंदता नई शैली को जन्म देती है। फिर कुछ नया आएगा, नई शैली आएगी। अभी की नई शैली को पिछली शैलियों को पढ़कर बढ़े लोग नकारेंगे ही।