bakar puran

‘बकर पुराण’ – समकालीन संदर्भों और उनके अर्थपूर्ण अन्यथाकथन पर एक पाठ के रूप में

दूसरे कई व्यंग्यकारों से कहीं अलग, लेखक का मानवीय संवेदना से जुड़ा होना इस पाठ (किताब) को पठनीय और स्मरणीय बनाता है जहाँ व्यंग्यकार वृहद् समाज से दूर नहीं बल्कि उसी का हिस्सा है और जिसका व्यक्तित्व लक्षणालंकारिक (metonymic) है।

दैनिक जागरण में छपे मेरे इंटरव्यू के वो हिस्से जो छप नहीं सके

10. क्या पत्रकारिता का अनुभव लेखन को संवार देता है?

पत्रकारिता का अनुभव नहीं, सिर्फ अनुभव आपका लेखन सँवार देता है। लेखन है क्या? चीज़ों को देखना, उसे समझना और तरह तरह की जटिलताओं को सहज भाषा में कह देना। पत्रकारिता एक नौकरी है जैसे कि ईंट ढोना या कोड लिखना। हर वक़्त आप तरह तरह के लोगों से मिलते हैं, चाहे आप ईंट ढो रहे हों, कोड लिख रहे हों या फिर रिपोर्ट कर रहे हों। हर वक़्त एक लेखक देखता रहता है, वो अपने दिमाग़ में एक एक घटना को रिकॉर्ड करता रहता है।