कंगना रणौत: जुनूनी, हिम्मती, स्वाभिमानी लड़की जो हर लड़की को होना चाहिए

जब एक स्त्री किसी पुरुषप्रधान समाज में टूटी, जर्जर सीढ़ियों को छोड़ते हुए अपनी अलग सीढ़ी बना लेती है तो बहुत दर्द होता है। ईगो हर्ट हो जाता है पुरुष का कि इसे तो मेरे बिस्तर में होना चाहिए था, ये कहाँ लक्ष्मीबाई बनकर घूम रही है!

मजाक कंगना रनौत का नहीं बॉलीवुड की नपुंसक सोच का उड़ा है

आइटम सॉन्ग पर तारिकाओं की थिरकती कमर और वक्षस्थल के कसाव के बीच की जगह दिखाने की ‘कला’ को अपनी अदाकारी के दम पर चुनौती देने वाली कंगना शायद उनके लीग की नहीं है।

फट के फ्लावर होते ही वॉलीवुड कितना क्यूट हो जाता है!

आदमी की आस्था और उससे होने वाले रिएक्शन के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए क्योंकि भीड़ की अभिव्यक्ति बड़ी ही निराली होती है, इनोवेटिव भी।

ऐ दिल है मुश्किल: अनुराग कश्यप जी आपसे बेहतर तर्क की उम्मीद थी

हमें अनुराग से उम्मीद थी कि उन्हें एक फ़िल्म और एक प्रधानमंत्री के शांति प्रयासों के लिए किए दौरे में अंतर का पता होगा। क्योंकि मुझे नहीं लगता अनुराग कश्यप इतने मूर्ख हैं कि वो ये कहकर बच लें कि ‘मैं तो मूर्ख हूँ, मुझे ये समझ में नहीं आता’।

Globalisation of Indian Cinema

Multiplexes and target audiences have changed the way of marketing and perception of cinema making as well. Now movies are being made on hand held cameras, in video format, more movies on 35mm and 16mm, use of spy cams, web cam and other concepts are pacing up the production and giving something innovative to the world audience. Internet has added to the fast promotion and advertising of cinema.