लिप्सटिक नारीवाद: फ़ैशन के दौर में गारंटी की इच्छा ना करें

क्या पूरे नारीवाद का विमर्श अब इतने पर आकर गिर गया है कि कोई सिंदूर क्यों लगाती है, बिंदी क्यों चिपकाती है, ब्रा क्यों पहनती है?

दिल्ली मेट्रो और आंटी का लिप्स्टिक नारीवाद: आप उतने भी वरिष्ठ नहीं हैं!  

हमारे एक मित्र हैं फेसबुक पर। उन्होंने एक वाक़या अपनी वॉल पर लिखा है कि किस तरह से उनके सत्तर साल के पिता और उनके एक बुज़ुर्ग मित्र को, एक महिला ने ‘वरिष्ठ नागरिक’ वाले सीट पर ये कहकर बैठने नहीं दिया, “आप उतने भी वरिष्ठ नहीं हैं।” हमारे मित्र ने संस्कारों के दायरे में […]

Your brand of feminism is a badly disguised misandry, ma’am!

Isn’t it great that all of the greatest poets like Ghalib, Mir, Momin, Faiz, Firaq, Faraz, Zauq etc are dead as otherwise they would be called misogynists! Nowadays, you can’t be sure when these license distributors and wholesale dealers of feminism call you patriarchal, misogynist and sexist! Now calling woman’s body a temple, means patronising […]