टॉक टू अ मुस्लिम: आख़िर मैं मुसलमानों से बात क्यों करूँ

कभी ये हैशटैग क्यों नहीं चलाते कि ‘टॉक अबाउट इस्लामिक टेररिज्म’? इस पर मुसलमानों के सेमिनार, पैनल डिस्कशन, चर्चा, विचार गोष्ठी, टीवी डिबेट आदि क्यों नहीं होते? और जब कोई हिन्दू या दूसरे धर्म के लोग चर्चा करेंगे और ‘इस्लामी टेरर’ शब्द पर ऐसे आपत्ति करोगे कि कुछ गलत बोल दिया! तुम उसे ‘बिगट’ और कम्यूनल कह दोगे!

ग़ुलामी के प्रतीकों पर गर्व करने वाली अकेली प्रजाति भारतीय ही है

कुल तीन पन्नों में आपको गुप्त वंश, मौर्य वंश, चोल, पांड्य, चेर, सातवाहन आदि को पैराग्राफ़ दे-देकर समेट दिया जाता है। बताया जाता है कि हम पर बलात्कार करने वाले और तलवार की नोक पर मुसलमान बनाने वाले आतंकी राजाओं के साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं होता था और फलाना आदमी कितना महान था!

हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले रोहिंग्या को भारत में शरण क्यों?

इस्लामी राष्ट्रों को आगे बढ़कर इन मुसलमान शरणार्थियों को, बंग्लादेशियों के साथ अपने यहाँ बसाना चाहिए। या फिर यूएन को कुछ जगहों पर इनके रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए। ये व्यवस्था वहाँ होनी चाहिए जहाँ संसाधनों की प्रचुरता हो, जनसंख्या की कमी हो, वर्कफोर्स की ज़रूरत हो।

गोरी चमड़ी पर दाग दिखते हैं, काले-भूरों पर तो ख़ून भी खो जाता है

भारत वाले कहते रहे कि पाकिस्तान में गढ़ है लेकिन तुमने उसे ‘कॉन्फ्लिक्ट’ कहा और बदले में पाकिस्तान को अरबों डॉलर का ग्राँट देते रहे।