अंधा कानून लुच्चा हो जाता है; सरकारों में नेता होते हैं, और नेता एक ही ब्रीड के होते हैं

सरकारों को पता है कि सरकारें परमानेंट नहीं हैं। आज हैं, कल नहीं, परसों फिर हैं। मोदी को पता है भारत कॉन्ग्रेस मुक्त नहीं होगा। घोटालों में इसी कारण से अंधा कानून लुच्चा भी नज़र आने लगता है। कोई भी देश किसी भी पार्टी से मुक्त नहीं हो पाती।

जज साहब! अपना काम कीजिए, गाँजा कम पिया कीजिए

इन गँजेड़ी जजों को दो करोड़ लम्बित मुद्दों को सुलझाने की बजाय सरकारों पर बेकार की लगाम कसने की फ़िक्र में रहने से बचना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का ईगो भी सुप्रीम है, लेकिन लॉर्डशिप को याद रहे वो लॉर्ड नहीं हैं

आपके बेटे-भतीजों का भला होना देश का भला होना नहीं है, कभी कॉलेजियम से बाहर आईए जज साहब। न्यायालय को दुकानदारी मत बनाईए, कि बाप का दुकान बेटा सँभालेगा।