मातृभाषा दिवस पर ठेठी में फेसबुक लाइव: बोलियों को बचाईए, उन्हें बोलिए, लजाईए मत

उनके लिए जो मैथिली और ठेठी भाषा समझ सकते हैं। इसमें मैंने बात की है कि मातृभाषा (जो भी हो) उसको बचाना क्यों ज़रूरी है। कैसे उसे बचाया जाय।

नई हिन्दी या नई वाली हिन्दी क्या है?

एक अभिजात्यता हिन्दी पर थोपने की कोशिश हुई कि हिन्दी तो ऐसे ही लिखी जानी चाहिए। इसके कारण, और अंग्रेज़ी स्कूलों के हर गाँव में पहँचने के कारण हिन्दी में लेखन सिकुड़ता चला गया।