वामपंथियों का चुनावी विश्लेषण: अंधविरोध, घटिया और चिरकुटई से परिपूर्ण

निकाय और पंचायत चुनाव राष्ट्रीय स्तर तक के सफ़र तक पहुँचने की पहली सीढ़ी है, वहाँ लोग पार्टी नहीं, अपने बूते पर चुनाव लड़ते हैं। ये उनके लिए स्क्रीनिंग टेस्ट की तरह होता है कि हमने तो खुद को साबित कर दिया, अब आप देख लो कि अगले चुनावों में हमें अपनी पार्टी में रखोगे कि नहीं।

प्राइम टाइम (विडियो): मुद्दों को गौण करने का तंत्र

तुम्हारे इसी स्वभाव के कारण तुम्हारी ये दुर्दशा है कि तुम्हारे कॉमरेड अब कामरेड और बलात्कारी हो गए हैं, तुम्हारे ज़मीन से जुड़े नेता हवाई यात्रा में 65 लाख ख़र्च कर देते हैं, और तुम्हारे धर्मविरोधी नेता का नाम सीताराम है!

वामपंथी सूअरों, पिगलेट्स को पहचानिए, फिर कीचड़ में उतार कर भाग जाईए

ऐसे लोगों को लगता है कि गाँजा पीकर वो बॉब मारले हो जाएँगे, और सिगरेट (चूँकि सिगार पी नहीं सकते) पीकर चे ग्वेरा।

लिबरलों का इन्टॉलरेन्स और अप्रासंगिक डिब्बाबंद प्रोग्रेसिव विचारकों की छटपटाहट

अब इनकी जंग सत्ता और राजाश्रयी पुलाव खाने के लिए है। और अगर पुलाव ना मिल रही हो तो ये उसकी गंध के लिए भी नंगा होने के लिए तैयार हैं।