श्श्शऽऽऽ… हिन्दी के नवोदित साहित्यकार सो रहे हैं!

हमारे दौर के साहित्यकार अंदर से मरे हुए हैं, नाम के भूखे हैं, और हीनभावना से ग्रस्त हैं। इनकी लेखनी को दीमक चाट गया है, और दिमाग तो गलकर कान के रास्ते रिस-रिस कर बह ही चुका है।

हिन्दी साहित्य के कुण्ठित सर्कल में सफल औरतें पतिता हैं, चरित्रहीन हैं

एक सफल स्त्री, वस्तुतः एक स्त्री, इस कुण्ठित समाज में अपनी योनि, स्तनों, और यौन इच्छाओं की पूर्ति की पागलपन के हद तक आकाँक्षा रखने वाली देह होने के अलावा कुछ भी नहीं। सफल स्त्री को इस तरह देखा जाता है मानो उसने हर सीढ़ी चढ़ते वक़्त एक रात, या कई रातें, किसी मर्द के साथ गुज़ारी जिसने उसे ऊपर ढकेला। वो किसी मर्द को सराहती है तो इसका अर्थ यही होता है कि वो उसके साथ सो रही होगी, तभी तो ऐसा करती है।

पत्र: कहानी क्या है, निहायत ज़रूरियात क्या हैं, आपकी पहचान क्या है

आपके मन में जो भी चल रहा हो, आपने अपने अनुभवों को जिस भी परिस्थिति में कल्पनाशीलता से रखा है, वही अभिव्यक्ति है। उसमें मसाला मत डालिए। मसाला हमेशा फ़ैक्ट्री से आता है और रेसिपी में इस्तेमाल होता है। आपके पास जो मसाला है, वो सबके पास है।

साहित्य और समाज: शुद्धता, व्याकरण, अच्छी भाषा, बुरी भाषा

साहित्य अपने आप में इतिहास है, मनोविज्ञान है, पत्रकारिता है, धर्मग्रंथ है। इस बात को समझिए और भाषा को सिर्फ कम्यूनिकेशन का माध्यम मत बनाईए, ये उससे कहीं ज़्यादा बड़ी बात है।

साहित्य में एनकोडिंग होती है, होनी चाहिए, नहीं कर पा रहे तो मत लिखिए

जो लेखक कल्पना को, भावनाओं को, अपने समय और पात्रों के चिंतन में गूँथता है, उसको डीकोड करने के लिए आपको इतिहास, मनोविज्ञान दोनों की समझ होनी चाहिए।

फ़ेसबुक पर सोए साहित्यकारों के नाम

सोशल मीडिया को समझिए और सेल्फी, प्रशंसा और आत्मुग्धता से ऊपर उठकर देश और समाज में हो रही बातों पर विचार रखिए। पूरे समाज की चर्चा का स्तर ऊपर उठाईए। आपको भी लाभ होगा, समाज को भी।

Responsibility of an author

People (at least in Delhi, India) have forgotten to read better books and champion themselves reading the books whose writers are not sure what is the importance of ‘…’ (Three dots in succession) or why it is just pathetic to say ‘we write what people want.’ Well, people want porn and it does sell well. […]

Ink flows in our veins: That’s why we should write

Expression is not the property of some said intellectuals as no one is born intellectual. It is not something that is naturally limited to a certain part of people rather a very natural phenomenon bestowed upon each organism on earth. We have different ways to express. One of them is via words, spoken or written. […]