कुछ बातें (A Few Words)

कल रात भी लिखीं थी कुछ बातें बस तेरे लिए जो सोचा था बस तेरे लिए जब देखे थे चंद ख़्वाब जहाँ हम और तुम बैठे थे झील में उतरती हुई लकड़ी के पुलिए पर पाँव लटकाए बातें करते तमाम दुनिया की जो परे है इस दुनिया से इसकी समझ से उन शब्दों में जो […]

तुम ही तो हो मेरी कविता (It’s you who is my poetry)

सोते सोते उनींदी आँखों की भारी पलकों के थोड़े नीचे से पतले होंठों की धीमी हलचल से तूने जो कहा था कि कविता कह दे मेरे ऊपर और मैंने लिखी थी कविता कहा था कि कितनी सुंदर हैं तेरी बातें कि कितनी चमकीली हैं तुम्हारी आँखे कि लरजते होंठों पर मेरा नाम कितना अच्छा लगता […]

खोया हिस्सा

‘खोया हिस्सा’ कहाँ समझी तुमने वो पंक्तियाँ जो मैंने लिखी थीं तुम्हारे न होने पर तुम्हारी यादों ने पकड़ी थी मेरी ऊँगलियाँ और लिखवाए थे वो चंद शब्द। मैं ख़ाली मकानों में वीरान सड़कों पर नंगी भीड़ में हर जगह तुम्हारे पाँव की आवाज़ ढूँढता हूँ और ढूँढता हूँ अपने वजूद के उस हिस्से को […]