मी टू मूवमेंट: पीड़ितों की आवाज़ें हमेशा दब क्यों जाती हैं?

ये लड़ाई नारीवाद और नारीवादियों की ही है। इसमें आप वैसे लोगों से आशाएँ मत रखिए जिनके लिए हर चीज विशुद्ध व्यापार है, ट्रान्जेक्शन है।

‘टाइम्स अप’: दोस्ती, सेक्सटिंग, सेक्स, सेक्सुअल फ़ेवर्स और विक्टिमहुड

मैं सिर्फ उन महिलाओं के साथ हूँ जो अक्षम थीं, जिनके पास क़ानूनी सहायता का कोई विकल्प न था, जिन्हें क़ैद करके रखा गया, जिनके साथ ज़बरदस्ती हुई और पुलिस या समाज ने उन्हें चुप कर दिया।

प्राइम टाइम: रवीश जी, वीकेंड का मुद्दा सोमवार का इंतजार नहीं करता!

लाइट लगवाना, गार्ड खड़े करने का मतलब है कि हमने मान लिया है कि बीएचयू में हरामी लौंडे तो घूमते रहेंगे, आप लाइट और गार्ड से बचाव करा लो! और लाइट में दुपट्टा खींचा गया तो? फब्तियाँ कसी गईं तो?

प्राइम टाइम (विडियो): मुद्दों को गौण करने का तंत्र

तुम्हारे इसी स्वभाव के कारण तुम्हारी ये दुर्दशा है कि तुम्हारे कॉमरेड अब कामरेड और बलात्कारी हो गए हैं, तुम्हारे ज़मीन से जुड़े नेता हवाई यात्रा में 65 लाख ख़र्च कर देते हैं, और तुम्हारे धर्मविरोधी नेता का नाम सीताराम है!

हरियाणा बराला काण्ड : लड़की को गरियाइए क्योंकि फ़ेसबुक में सिगरेट मिला है!

इस देश में सीसीटीवी इतने संवेदनशील होते हैं कि किसी अबला पर हो रहे अत्याचार को देख ही नहीं पाते। आखिर भाजपा के राज में सीसीटीवी का संस्कारी होना तो बनता है।

फ़ेसबुक पर सोए साहित्यकारों के नाम

सोशल मीडिया को समझिए और सेल्फी, प्रशंसा और आत्मुग्धता से ऊपर उठकर देश और समाज में हो रही बातों पर विचार रखिए। पूरे समाज की चर्चा का स्तर ऊपर उठाईए। आपको भी लाभ होगा, समाज को भी।

बैंग्लोर मोलेस्टेशन काण्ड, धोनी और ग़ायब होती चर्चा

विडियो देखिए। धोनी तो गए और साथ ही चर्चा में बैंगलोर काण्ड की जगह भी ग़ायब हो गई। सोशल डिस्कोर्स का शीघ्रपतन ऐसे ही होता है। अंग्रेज़ी के दर्शकों के लिए बता दूँ शीघ्रपतन इम्मेच्यॉर इजेकुलेशन को कहते हैं।