फ़वाद और माहिरा ख़ान को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलना ही चाहिए

इन दोनों को शांति को नोबेल दे देना चाहिए। क्योंकि इतना सोचने समझने के बाद इन्हें लगा कि उरी हमला जो भारत पर हुआ है वो एक देश के ख़िलाफ़ नहीं, मानवता के ख़िलाफ़ हमला है। और इन दोनों के पोस्ट टाइमलेस, कालातीत, हैं। समय से परे इन्हें आप किसी भी दिन उठाकर पढ़ लो रेलेवेंट लगते हैं।

पश्चिम में उगा सूरज: केजरीवाल ने मोदी को किया सेल्यूट, कहा सबूत दिखाओ

सर्जिकल स्ट्राइक के ना होने की बात इतनी बार कही गई है कि आपको अपनी सेना पर शक होने लगेगा क्योंकि हमारा कोलोनियल हैंगओवर ये कहता है कि चाहे भारत का प्रधानमंत्री, सेना मुख्यालय, रक्षामंत्री कुछ भी कहें, जब तक बीबीसी उसको सही नहीं बताए, वो गलत ख़बर है।

मोदी को देशहित में गाली सुननी चाहिए, बुद्धिपिशाचों का नया तर्क

तुम्हें सिर्फ गाली देने से मतलब है। तुम्हें च्यूंटी काटने से मतलब है, तुम्हें किसी को भक्त कहने से मतलब है और फिर अपने ही सीमित ज्ञान के दंभ पर खुद को सबसे ज्ञानी मानते हुए, दूसरे की हर बात को तुच्छ मानते हुए हँसने से मतलब है।

कश्मीर में सेना के 17 जवान शहीद, तुम्हारा ख़ून कब खौलेगा रे फैजल?

वो हमारे सैनिकों को मार रहे हैं, हम उन्हें मारेंगे। हिसाब गणित का है, भावना हिन्दुस्तानी है। बातचीतों का दौर कपल्स के बीच अच्छा लगता है। वक़्त आ गया है कि पाकिस्तान को पाकिस्तानी तरीक़े से ही जवाब दिया जाय।

संवेदनशून्य मैं

आमतौर पर मैं आज़ादी या किसी और भी खुश होने वाले दिन खुश नहीं होता। कारण मुझे पता नहीं और न कभी मैंने इस विषय पर कोई आत्मचिंतन किया है । हो सकता है कि मुझे ज़रूरत महसूस न हुई हो। होने को तो प्याज का दाम भी कम हो सकता है और देश की […]