प्राइम टाइम: रवीश जी, वीकेंड का मुद्दा सोमवार का इंतजार नहीं करता!

लाइट लगवाना, गार्ड खड़े करने का मतलब है कि हमने मान लिया है कि बीएचयू में हरामी लौंडे तो घूमते रहेंगे, आप लाइट और गार्ड से बचाव करा लो! और लाइट में दुपट्टा खींचा गया तो? फब्तियाँ कसी गईं तो?

प्राइम टाइम 30: अगले दंगों के ख़ून से पत्रकारों, बुद्धिजीवियों के हाथ सने होंगे

इन दोगले पत्रकारों को नकारिये जो मरने वाले का धर्म तलाश कर प्राइम टाइम में आँकड़े बताते हैं। इन बुद्धिजीवियों से बचिए जो टट्टी के रंग में जाति खोजते हैं।

प्राइम टाइम २२: सेल्फ़ी खिंचाने वाले प्रोटेस्टर का कोई माय-बाप नहीं होता

अगर आप किसी चीज़ से असहमति रखते हैं तो आप फ़ौरन विद्वान समझ लिए जाएँगे। जहाँ आपने ये कहा कि ‘मेरा इस विषय पर अलग विचार है’, आप बुद्धिजीवी होंगे उस सभा में।

प्राइम टाइम २०: चुनावी मौसम में वेमुला, नजीब, मनु स्मृति की वापसी

एक सर्वे कीजिए। सड़क पर जाईए और हिन्दुओं से पूछिए कि क्या उन्होंने मनु स्मृति का नाम भी सुना है? पूछिए कि क्या उसका एक श्लोक भी जानते हैं? पूछिए कि क्या वो अपनी ज़िन्दगी मनु स्मृति के हिसाब से चलाते हैं?

प्राइम टाइम १५: सेव एनर्जी, गो डार्क दिस क्रिसमस

और हाँ टर्कियों को मरते वक्त ईद के बकरे, यूलिन फ़ेस्टिवल के कुत्ते और नेपाल वाले भैंसा कटने वाले पर्व के विपरीत बिल्कुल भी कोई दर्द नहीं होगा क्योंकि ये फ़र्स्ट वर्ल्ड वालों का पर्व है ना।

प्राइम टाइम: स्लम कैसे बनते हैं? ग़रीब कहाँ से और क्यों आते हैं?

ग़रीब लोग, जो दिल्ली की सरकारी ज़मीन पर झोपड़पट्टियों में, स्लम बना कर रहते हैं वो कौन हैं और कहाँ से आते हैं? आज एक ख़बर देखी कि महरौली में एक स्लम को बुल्डोजर से तोड़ दिया गया। स्लम में आग लगना, बुल्डोजर से तोड़ दिया जाना, ख़ाली करा देना ऐसी ख़बरें हैं जिससे आपकी […]

6 दिसम्बर वाला प्राइम टाइम बाबरी मस्जिद से लाइव

एक-दो मस्जिद टूटे, वो याद रखना ज़रूरी है। क्या है कि इन यादों को याद दिलाते रहने से हमारा और नेताओं का पेट चलता है।

प्राइम टाइम: 500-1000 के नोट वाला आपातकाल

हमको अर्थशास्त्र का ज्ञान नहीं है। लेकिन हमको लगता है कि जो सेक्रेटरी लेवल का आईएस होगा, आरबीआई का जो गवर्नर होगा, उसकी जो टीम होगी, उसको हम से ज्यादा अर्थशास्त्र आता होगा।

रवीश से मुझे दिक्कत है

दिक्कत तब से हुई है जब से दिल्ली के चुनाव घोषित हुए हैं। मैं भाजपा को वोट देता हूँ, आगे भी दूँगा। दिल्ली का वोटर हूँ नहीं पर सरकार भाजपा की चाहता हूँ। ये मैं पहले ही पैरा में क्लियर कर दे रहा हूँ क्योंकि रवीश कुमार आजतक क्लियर कर नहीं पाए कि वो किस […]