दंगों का दौर शुरु हो गया है, कमर-पेटी बाँध लीजिए

ये सच्चाई है कि पहले जो समाज हिंसक नहीं था, उसे अब हिंसक बनाया जा रहा है, या वो खुद ही एक का तुष्टीकरण देखकर हिंसक प्रवृति दिखाने लगे हैं। इस हिंसा और वोटबैंक का सहारा एक तरह के लोग उठाते रहे, अब दूसरी तरह के लोग भी दंगे करा रहे हैं, और आगज़नी में शामिल हैं।

आप गलत को गलत कहिए, हम ज़रा धर्म-जात-राज्य पता कर लें…

ग़लती किसने की है, क्या इस भीड़ के सर पर टोपी है, क्या इस भीड़ के खड़े होने की जगह बंगाल या कश्मीर तो नहीं, अगर चुनाव है तो उसकी जाति निचली है कि नहीं। उसके बाद इनकी संवेदनाएँ जगती हैं।

Some English Haiku

Attempting my hand on Haiku, a Japanese form of poetry which follows 5-7-5 pattern, the two lines have juxtaposition of different ideas or images and the third brings a different perspective. 1: Nelson Mandela passed away somewhere College student stressed his brain a lot What could be Gauhar’s age? 2: Father was BPL* card holder […]