लिखने की प्रक्रिया: चाय के कप और होंठों तक कई फिसलनें हैं

सही ट्रीटमेंट बहुत ज़रूरी होता है, वरना कहानी की जगह वो अक्षरों के झुंड से बने शब्द, शब्दों के झुंड से बने वाक्य, वाक्यों के झुंड से बने पैराग्राफ़ और पैराग्राफ़ों के झुंड से बने छपे पन्नों से ज़्यादा कुछ नहीं हो पाएगा।

पात्रों पर चर्चा: चुनाव, रचना, विकास साहित्य की विधाओं के संदर्भ में

सबसे ज़रूरी बात ये है कि पात्र हमेशा हमारे इर्द गिर्द होते हैं। उन्हीं से आप नए पात्र गढ़ते हैं। विशुद्ध कल्पना जैसी कोई चीज नहीं होती। हमारी कल्पना वास्तविकताओं के हिस्सों को इधर-उधर जोड़ने और तोड़ने से जन्म लेती है।

पत्र: कहानी क्या है, निहायत ज़रूरियात क्या हैं, आपकी पहचान क्या है

आपके मन में जो भी चल रहा हो, आपने अपने अनुभवों को जिस भी परिस्थिति में कल्पनाशीलता से रखा है, वही अभिव्यक्ति है। उसमें मसाला मत डालिए। मसाला हमेशा फ़ैक्ट्री से आता है और रेसिपी में इस्तेमाल होता है। आपके पास जो मसाला है, वो सबके पास है।