सोलह दिसम्बर की वो सुबह!

माँ की आँखों के आँसू सूख गए। बच्चों की लाशें, घायल शरीरों को सरकारी अस्पतालों से निकाल दिया गया। बच्चों के शरीर वापस स्कूल की तरफ पहुँचाए गए। खून की पसरी हुई निशानियाँ, ज़मीन से नमीं और लाली लिए सिमटीं और फिर बूँद और धार बनकर ऊपर को उठीं। किताबों के पन्ने सफ़ेद हो गए। […]