ये टूजी फ़ैसला मोदी की सरकार को तबाह कर सकता है

2जी प्रकरण के फ़ैसले को पत्रकारों की एक लॉबी ये कहकर दिखा रही है कि कोर्ट ने कहा कि ये हुआ ही नहीं। जबकि यहाँ बात कुछ और ही है। कोर्ट साक्ष्यों के बल पर फ़ैसले देती है। वकीलों ने केस ही उतना मज़बूत नहीं किया, और ये लोग बरी हो गए।

वैसे तो ये ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला है, जबकि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में स्पैक्ट्रम आवंटन रद्द किया था। कैग विनोद राय को बड़े-बड़े पत्रकार घेर रहे हैं कि घोटाले का नाम तो ‘विनोद राय घोटाला’ होना चाहिए। जबकि कैग ने जितना पैसा बताया था कि नीलामी से आना चाहिए, एनडीए सरकार ने नीलामी से उतने पैसे जुटा भी लिए। ये बात खैर इग्नोर कर दी जाएगी। इस बात को भी सच मान लिया जाएगा कि ए राजा क्रांतिकारी हैं, जिन्हें चोर बना दिया गया।

कोर्ट के जज के फ़ैसलों में जिस तीक्ष्णता से सरकारी वक़ील पर वार किया गया है वो ये भी दिखाता है कि यूपीए भले सत्ता से चली गई है, लेकिन तंत्र में बहुत लोगों की पैठ इतनी गहरी है कि नई सरकारों के मुख्य मुद्दे को अंडरमाइन कर सकते हैं। खेल क्या है, वो सबको पता है लेकिन हम न्यायालयों पर उँगली नहीं उठा सकते।

कल तक सीबीआई को तोता-मैना बुलाने वाली पार्टी अचानक से सीबीआई में विश्वास दिखाने लगी है। ईमानदारी और विश्वास के स्तम्भ मनमोहन सिंह ये कहते नज़र आ रहे हैं कि ये सब एक प्रोपेगेंडा था! मनमोहन सिंह सिर्फ एक नेता हैं जिन्होंने अच्छे जगह से पढ़ाई की है। वो भी किसी पार्टी के सदस्य हैं, और जो उन्हें दूध का धुला मानते हैं, उनको उनके बयान लगातार पढ़ते रहने चाहिए।

जो पार्टी और पत्रकार स्पेशल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में २२ साल चले मुकदमे के फ़ैसले के बाद भी एक अंतिम प्रयास के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा सुबह के चार बजे खुलवा लेते हैं, वो इस मामले में सबसे निचली अदालत के इस फ़ैसले पर कि सबूतों के अभाव में बरी किया जाता है, ख़ुशियाँ मना रहे हैं और विन्डिकेटेड फ़ील कर रहे हैं! ये एक सुखद आश्चर्य और मनोरंजक क्षण है।

अगर मोदी सरकार तुरंत ही हाइकोर्ट में अपील नहीं करती और बेहतर तरीक़े से, नए क़ानूनी अफ़सरों और वकीलों के साथ नहीं आती तो 2019 की राह आसान नहीं होगी। इस एक फ़ैसले को आधार बनाकर कॉन्ग्रेस और चाटूकार पत्रकारों की लॉबी यूपीए सरकार को सारे घोटालों में क्लीन चिट दे देगी। ऐसा हुआ तो जनता ये मान लेगी कि भ्रष्टाचार का पूरा बाजा सिर्फ सुनाने के लिए बजाया गया था, और सब लोग एक ही हैं।

ये वो समय है जब मोदी को विश्वास दिलाना होगा कि ‘नए गोरे आज़ादी के बाद राज नहीं कर रहे’। मोदी को ये बताना होगा कि चेहरे ही नहीं, सरकार वाक़ई बदली है। क्योंकि ऐसे समय में तमाम आर्थिक सुधार, विजन और न्यू इंडिया के लिए किए गए इन्वेस्टमेंट्स मुँह के बल गिरेंगे। और देश को इस समय ऐसे सरकार की ज़रूरत नहीं है।….

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