पर्दाफ़ाश: ईवीएम का शिंजो अबे कनेक्शन; हैक है, हारना एक नौटंकी है

दोस्तो, हमारे समर्थक फ़ेसबुकिया नंगा पत्रकार समूह आपको बार-बार ईवीएम कैसे हैक हो सकती है, कितनी जगह हैक हो गई आदि की ख़बरें तो पहुँचाते ही रहते हैं। अभी जो आप कर्नाटक की हार देख रहे हैं, संघियों की, या फिर आज के उपचुनावों के परिणाम में भाजपा अगर कुछ सीट हार जाती है, तो फिर ये मत सोचिएगा कि ईवीएम हैक नहीं हुई।

जी नहीं। यही तो चाल है संघियों की। इसीलिए तो अमित शाह को चाणक्य कहा जाता है। वो हमेशा यही करता आया है। वो हमें पंजाब में जीत दे देता है ताकि हम ईवीएम फ़्रॉड का हल्ला न मचा सकें। हमारी आंतरिक कमिटी ने बताया है कि हमारी औक़ात नहीं थी कि हम कर्नाटक में इतनी सीटें भी ला पाते। 

सूत्रों ने बताया है कि भाजपा येदियुरप्पा को सबक सिखाना चाहती थी, उसे असफल दिखाना चाहती थी ताकि वो अनंत हेगड़े को आगे कर सके। इसी चक्कर में उन्होंने जानबूझकर न सिर्फ कम सीट लाने वाले ईवीएम रखवाए, बल्कि हमारे कई विधायकों को ख़रीदने की बात कहकर अप्रोच तक नहीं किया।

बहुत कम लोग जानते थे कि सोनिया जी का ये आदेश था कि भाजपा से जो भी दस करोड़ प्रति विधायक मिलें उनमें से कॉन्ग्रेस को ढाई करोड़ कमीशन दे दिया जाए ताकि पार्टी के पास फ़ंड बढ़ सके। हमारे विधायक तैयार बैठे थे लेकिन येदियुरप्पा से नाराज भाजपा ने हमारी तरफ से प्रति विधायक सौ करोड़ के रेट को पब्लिक करने के बाद भी हमें अप्रोच नहीं किया। ये सब एक चाल थी। या शायद हमने अपनी बोली कुछ ज़्यादा लगा दी थी।

भाजपा हमेशा छोटे स्तर के झगड़े हार कर युद्ध जीतने पर लगी रहती है। इससे वो ईवीएम वाली बात को दबा ले जाते हैं। हमें सब मालूम है कि हम बिलकुल नहीं जीत सकते थे कर्नाटक लेकिन इतनी सीटों का आना बताता है कि भाजपा ने ईवीएम पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ये चाल चली और सफल भी हो गए। 

लेकिन हमें ईवीएम के मुद्दे को लगातार ज़िंदा रखना है ताकि हमारे कार्यकर्ता से विश्वास करते रहें कि उनकी लीडरशिप निकम्मी नहीं है, बल्कि मोदी लोकतंत्र को बेच रहा है। हमारे नेता माननीय राहुल गाँधी से लेकर तेजस्वी तक के डिम्पल पड़ते हैं। क्या इतना क्यूट आदमी लोकतंत्र के साथ विश्वासघात कर सकता है? मैं तो नहीं मानता। 

इसलिए ईवीएम हैकिंग का नारा लगाते रहिए। और आपको ऐसी ख़बरें मीडिया से मिलती रहेंगी क्योंकि सबको पता है कि चुनाव आयोग के पास इतनी मशीनें हैं, और एक दो तो खराब होती है हैं। इसी बात को हमें पकड़ना है और ये हल्ला करते रहना है कि जब एक ईवीएम खराब हो सकती है तो फिर सारे क्यों नहीं। 

एक बात और, ये वीवीपैट की जो नौटंकी आई है, उस पर भी हमलोगों को तैयार रहना है। वीवीपैट में मोदी ने जापानी तेल लगा हुआ काग़ज़ लगाया है जो कि तीन सेकेंड तक आपको एक सिंबल दिखाएगा जिस पर आपने वोट किया है, और फिर वो कमल में बदल जाएगा क्योंकि हवा में आते ही टेम्पररी इंक गायब हो जाता है। कभी गौर से वीवीपैट मशीन देखी है? वो ढका क्यों रहता है? क्योंकि उसमें अंदर में जापानी तेल रहता है। 

हिन्दी के अख़बारों में जिस जापानी तेल का विज्ञापन आप देखते हैं, कभी सोचा है उसका इतना विज्ञापन क्यों होता है, कहाँ से पैसा आता है? क्योंकि अमित शाह सारा तेल ख़रीदकर चुनाव आयोग भिजवा देते हैं। फिर वो तेल भाजपा मुख्यालय में पहले से तैयार पेपर रोल पर, जिसमें कमल की तस्वीर छपी रहती है,  लगाई जाती है, उसके सूखने के बाद एक काले कमरे में रखा जाता है और फिर उसे वीवीपैट मशीनों में बंद किया जाता है। अंदर भी लगातार एक स्प्रे के ज़रिए जापानी तेल का वाष्प पेपर पर जाता रहता है। 

अगर वो बंद नहीं रहेगा तो हवा के सम्पर्क में आते ही सब कमल निशान दिखने लगेगा। यही कारण है कि बाकी मशीन चिपटी रहती है, लेकिन ये मशीन एक बड़े डिब्बे की तरह होता है क्योंकि असली बात तो जापानी तेल को बंद करने की है। यही कारण है कि मोदी जापान के प्रधानमंत्री से इतनी बार मिलने जाता रहा है। बात को समझिए दोस्तो, और कमर कस लीजिए कि व्हाट्सएप्प और सोशल मीडिया पर हमें कैसे क्या करना है। 

2019 में भारत बनेगा लंदन
इसलिए ब्रोज़, वोट फ़ॉर महागठबंधन 

– अजीत भारती
मुख्य सोशल मीडिया मैनेजर
महागठबंधन आईटी सेल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *