ईमानदार पार्टी के नेता केजरीवाल वैश्विक नेता हैं, इनको दिल्ली से निकाला जाय

आम आदमी पार्टी के साथ बहुत ज़्यादा नाइंसाफ़ी हुई है। हमेशा होती रहती है। होती रही है। और दुनिया में सबसे ज़्यादा दुःख किसी को हो सकता है तो वो मुझे है। क्योंकि अन्ना के आंदोलन से दिनों से ही मैंने केजरीवाल की पूजा की है। मुझे याद है कि वहाँ के टेंट में फ़्री के समोसे खाने मुखर्जीनगर से कितने खलिहर विद्यार्थी ‘अन्ना की आँधी’ में बहे थे क्योंकि प्री हो गया था, मेन्स होनेवाला था नहीं। कॉलेजों में भी छुट्टी थी।

ख़ाली लोगों को अचानक से देश में फैले भ्रष्टाचार की फ्रिक्र में डालने वाले अन्ना और फिर बाद में उनको ज़बरदस्ती अपना गुरू बनाने वाले केजरीवाल दोनों को देश की तरफ से धन्यवाद करना चाहिए। युवा अचानक से सेंसिटिव हो गया था और अन्ना में गाँधी दिख रहे थे। भले ही हाफ पैंट पकड़ कर, बीच की जगह खुजलाते हुए विदेशनीति डिसकस करने वाली इस पूरी पीढ़ी ने गाँधी को गरियाने के सिवा बहुत कुछ किया नहीं हो, वो बात अलग है।

लेकिन असर ये हुआ कि मेट्रो में दो लोग लड़ जाते थे कि किया आप अन्ना के साथ हैं? सामने वाले ने कहा होता कि नहीं, तो वो उसे कहते कि वो भ्रष्ट था। भ्रष्ट लोगों को भाँपने की इससे अच्छी जुगाड़ तकनीक आधुनिक समय में कहीं नहीं है। इससे बेहतर एक ही तकनीक आई है देश में और वो है अपने इसरो के पास जो दारू के चखने के दानों की तरह उपग्रह फेंकता रहता है आकाश में। और पूरा देश ‘हाय’ हो जाता है।

केजरीवाल ने अन्ना को ऊपर जाते देखा तो गुरू पर सबसे पहला उपकार कर दिया कि उनको लाइमलाइट से हटा दिया। वैसे अन्ना तो था ही अराजकतावादी कि उसको कानून अपने हिसाब का ही चाहिए था, लेकिन अरविन्द को ये बात पसंद नहीं थी। ये क्या बात हुई कि अन्ना सड़क से अपने मन का कानून बनवाते! ऐसे तो वो पूरे देश में प्रसिद्ध हो जाते, और ये एक चेले के लिए कितनी ख़राब बात है कि उसके रहते गुरू को क्रेडिट मिल जाय। गुरू तो पोस्टरों पर होने के लिए होते हैं, क्योंकि गुरु गुड़ ही रहता है और चेला सल्फरलेस पॉलिश्ड चीनी हो जाता है।

अरविन्द केजरीवाल ने देश पर एक एहसान किया और अन्ना जैसे अराजकतावादी को हटाया और देश सुधारने के लिए 1484 वर्ग किलोमीटर की दिल्ली में पार्टी खोल दी। पार्टी तो आप कहीं भी बना सकते हैं लेकिन जितनी ख़ूबी से दिल्ली में ये काम हो सकता है, वो कहीं और नहीं। और बात देशसेवा, भ्रष्टाचारियों को हटाने की थी, तो सारे वैसे लोग कहाँ हैं? दिल्ली में। दिल्ली में पार्टी बनी और ऐसा बहुमत दिया जनता ने कि बीवी-बच्चों की क़सम खाने वाला केजरीवाल काँग्रेस के सपोर्ट से, सिर्फ हमारे आपके जैसे जनता के लिए, सरकार बना दिया।

यूँ तो केजरीवाल जी पारदर्शिता की मूर्ति हैं और एक बार क़सम खा लेते हैं तो सिर्फ जनता की सुनकर ही तोड़ते हैं, वो भी जब अवसर मुख्यमंत्री बनने का हो। मैं तो उन्हें उसी दिन पहचान गया था जब वो प्रधानमंत्री की कुर्सी की बजाय दिल्ली पर सेटल हो गए क्योंकि जनता ने उन्हें कहा था कि बीवी-बच्चों की क़सम खाने से कौन मरता है, आप तो दिल्ली संभालो। इतना निष्कलंक आदमी क्या बना दिया गया है… मैं लिखते-लिखते रो रहा हूँ!

ये केजरीवाल की महिमा नहीं तो और क्या है कि सिर्फ (पार्टी के चार) लोगों की इच्छा पर वो बनारस से चुनाव लड़ गए और दिल्ली को देश समझकर चार सौ प्रत्याशियों के ज़रिए करोड़ों के डोनेशन सरकारी ख़ज़ाने में ज़मानत ज़ब्त कराकर जलवा दी। अब इसमें किसी को निःस्वार्थ भाव से देशसेवा नहीं दिख रही तो आप अपना दिमाग़ मुहल्ला क्लीनिक में ठीक कराईए। ज़रा सोचिए कि विदेशों से कितना चंदा मँगाया। अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं से ख़ुद को थप्पड़ मरवाया, इंक फिंकवाया, अंडे फिंकवाए ताकि चंदा आने की दर नीचे ना हो।

और वो सब चंदा कहा गया? ज़मानत ज़ब्त होने में गया। बाकि का कहाँ गया इस पर कपिल मिश्रा ने आज कुछ कहा है। क्या कहा है, वो पता नहीं लेकिन चूँकि केजरीवाल के ख़िलाफ़ है तो मैं उसे मानने से इनकार करता हूँ। क्योंकि काग़ज़ फहराकर हवा में दिखाते हुए नेताओं के भ्रष्टाचार की फ़ाइल सिर्फ केजरीवाल ही दिखाकर शमाँ बाँध सकते हैं। बाकी लोग उनको बस कॉपी करते हैं। वो तो अच्छा है कि देश चलता रहे इसलिए केजरीवाल जी ने वो दस्तावेज़ कभी आम नहीं किए वरना एक ही साथ सारे भ्रष्ट लोग जेल में चले जाते। अगर ऐसा हो जाता तो देश कौन चलाता?

अन्ना तो इतने बड़े वाले निकले कि जिन चेलों ने उनको महान बनाया, उसे ही गरियाकर किनारा कर लिया है। अन्ना को केजरीवाल के हिसाब से चलना चाहिए था, ताकि करोड़ों के डोनेशन आते रहते और गोवा, पंजाब आदि हर जगह ईवीएम हैक करने वालों को भाजपा से ज़्यादा पैसे देकर आम आदमी पार्टी जीत जाती। क्योंकि जीत तो हैकिंग से ही होती है। अंकित लाल की ट्रेंडिंग आर्मी पता नहीं क्या कर रही थी कि एक बार हैक कर 67 सीट लाने के बाद केजरीवाल पार्टी उसको दोहरा नहीं पाई। उनके पास तो टेक्नॉल्जी थी ही, क्योंकि सौरभ भाई तो हैकिंग स्पेशलिस्ट हैं, और केजरीवाल आईआईटी से पढ़े इंजीनियर जो कि दस तरीक़े जानते हैं।

सीधी सी बात है कि हैकिंग से भी जब केजरीवाल जीते तो भी उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए तीन सीटें भाजपा को दे दीं थीं। लेकिन भाजपा वाले जब हैकिंग से जीते तो एक भी सीट उत्तराखण्ड, मणिपुर या उत्तर प्रदेश में नहीं दिया। ये भाजपा वाले किसी के नहीं, सिर्फ मोदी-मोदी जपवा लो इनसे। पहले तो बताया कि इन नेताओं में अंदर की सेटिंग होती है, बाद में यूपी चुनाव में तीन चौथाई बहुमत हैक करके, एक भी आम आदमी पार्टी को सीट नहीं दी। सीधा बैक स्टैबिंग किया। ऐट टू ब्रूटस टाइप मारा सालों ने।

सर जी ने हर संभव प्रयास किया कि वो देश के प्रधानमंत्री बने, बनारस लड़ा; पूर्ण राज्य का मुख्यमंत्री बनें, पंजाब में घर लिया और सत्येन्द्र को सतिंदर तक कहा ट्वीट में। लेकिन ये पागल जनता इन मासूम कैम्पेनिंग के तरीक़ों से कहाँ किसी की हुई है! हैकिंग वाले ईवीएम से काँग्रेस को जिता आई। जिताना ही था तो भाजपा को जिताती कि हैकिंग वाली बात बोलते रहते तो थोड़ा क्रेडिबल लगता। लेकिन अब क्या, अंदर की बात तो केजरीवाल को पता है ना कि उन्होंने हैकिंग की ट्रिक भाजपा को कैसे बताई थी।

आज बताईए, इतना अच्छा गवर्नेंस दिया कि लोग उन्हें दिल्ली में चाहते ही नहीं। कहते हैं कि जाओ यहाँ से ताकि कुछ बड़ा काम कर सको। निगम चुनावों में जनता ने हिन्ट दिया कि भैया तुम कोई और जगह सुधारो, दिल्ली तो सुधर ही गई है। लेकिन केजरीवाल जी को तो अभी चुनावों के दौरान मुसलमानों को एक-एक करोड़ की राशि मरने पर देनी है क्योंकि वो एक बार दिल्ली की डीटीसी में बैठे थे, इतनी रिस्पॉन्सिबिलटी तो बनती है ना माइनॉरिटी के लिए!

कुल मिलाकर ये है कि ये भाजपा वाले अब पार्टी को तोड़ना चाहते हैं। ये नीच हैं ही। इन्होंने यही तो किया है। ईवीएम से नहीं तोड़ पाए तो इक्कीस विधायक पर लाभ के पद वाला टंटा फँसा रखा है। बाकी बारह पर औरतों को छेड़ने का, बुज़ुर्गों को मारने का आरोप लगवा दिया है। जब हमने डिग्री पर सवाल किए तो हमारे ही कानून मंत्री की डिग्री फ़र्ज़ी निकलवा दी!

मुझे तो बस इंतज़ार है कि अरविन्द जी अपने काग़ज़ों के पुलिन्दे से कुछ ख़तरनाक टाइप का निकालेंगे और भाजपा को भ्रष्ट साबित कर देंगे जैसे कि शीला दीक्षित को कर दिया। मैं तो मिलकर भी आया हूँ शीला जी से, तिहाड़ में कंकड़ वासी दाल बीनती नज़र आईं। इसीलिए तो यूपी चुनावों में कभी दिखी नहीं।

कुल मिलाकर कहना ये है कि केजरीवाल जी को एक्सपोर्ट कर दिया जाय क्योंकि वो अब एक वैश्विक नेता हो गए हैं। वो भारत तो छोड़िए, दिल्ली के अपने क्षेत्र के भी लायक नहीं हैं। एक्सपोर्ट क्वालिटी का माल इस वातावरण में सड़ ना जाय। भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो इन्होंने पूरे देश को ख़ुद का बनाया हुआ ईवीएम हैक करके दिखाया। और क्या चाहिए आपको? कपिल मिश्रा ने आरोप लगाए तो संजय सिंह ने भाजपा के पाप गिना ही दिए, और क्या चाहिए भाई? आदमी छाती फाड़ के दिखा दे क्या? तुमलोगों के चक्कर में एक बार तो बीवी-बच्चों की क़सम तोड़कर पाप का भागी बन चुका है, अब क्या चाहते हो?….

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