आपके पास दो गायें हैं: कम्यूनिज्म, सोशलिज्म, कैपिटलिज्म, फासिज्म

कम्यूनिज़्म

आपके पास दो गायें हैं। वो दूध भी देती हैं, और संभावना है बच्चा भी देंगी। तभी आलाकमान से फरमान आता है कि भारत के हिन्दुओं को गाय माता की तरह दिखती है और हिन्दुओं के इस प्रतीक चिह्न को मिटाना है। आप लाल सलाम कहते हुए गायों को काट देते हैं और हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए सड़कों पर ‘बीफ़ ईटिंग फेस्टिवल’ मनाते हैं।

फिर आपको याद आता है कि खाने के लिए ना तो दूध है, ना ही माँस। फिर आप गरीबी का जिम्मेदार फासिस्ट सरकार को बताते हुए आंदोलन करते हैं। फासिस्ट सरकार आपको सब्सिडी देकर फिर दो गाय देती है, और उसे पालने का तरीका भी बताती है। फिर एक दिन आलाकमान से फरमान आता है। फिर वही बातें दोबारा होती हैं।

सोशलिज्म

आपके पास दो गायें हैं। उसमें से एक आप बगल के गरीब पड़ोसी को दे देते हैं। गरीब पड़ोसी चालाक है। वो दूध बेचकर धंधा शुरू करता है और गायों का व्यापार शुरू कर देता है। आप वही हैं, एक गाय को लेकर। फिर एक दिन आपकी गाय दूध देना कम करते हुए बंद कर देती है। तब आपका तीसरा पड़ोसी आपको उकसाता है कि ये दूध तो देगी नहीं तो इसे मारकर खा लिया जाय।

आप मना करते हैं तो आपको वो बहुत पीटता है और हल्ला करवा देता है कि इसके घर में गाय का माँस मिला है। लोग ये चेक करना जरूरी नहीं समझते कि गाय तो वहीं पिछवाड़े में बँधी हुई है। आपको ये लोग पीट-पीट कर मार देते हैं। हल्ला करने वाला पड़ोसी आपकी गाय खोल कर ले जाता है और हत्या के बाद मचे हुए बवाल को हवा देते हुए ‘बीफ़ ईटिंग फ़ेस्टिवल’ का आयोजन सड़कों पर करता है।

फ़ेस्टिवल एक ही जगह पर होने से उतना इम्पैक्ट नहीं आता तो वो अपने जेएनयू के वामपंथी साथियों की मदद माँगता है। फिर उसे कहा जाता है कि गरीब आदमी के पास कई गायें हैं तो उसको देश में आने वाली सर्वहारा क्रांति में मदद के लिए ‘योगदान’ के नाम पर गायें माँग ली जाएँ। लेकिन गरीब आदमी, जो अब अमीर है, वो ऐसा नहीं चाहता।

अब तीसरा पड़ोसी, उसकी पिटाई करता है और उसे गायब कर देता है। गायब करने के बाद उसे एक मुसलमान बता दिया जाता है और उसको गायब करने का षडयंत्र फासीवादी सरकार के संरक्षण में पलने वाले गुटों के सर मढ दिया जाता है। धीरे-धीरे गायों को मार-मार कर खा लिया जाता है। ये बताने की जरूरत नहीं कि तीसरा पड़ोसी कम्यूनिस्ट था और वो मानने लगा था कि सबसे बढिया शासन प्रणाली कम्यूनिज्म ही है।

कैपिटलिज्म

आपके पास दो गायें हैं। आप एक को बेच देते हैं और उससे घर पर डॉक्टर को बुलाकर गाय को गर्भवती कर देते हैं। बचे पैसों से चारा आदि का इंतजाम करते हैं। फिर गाय एक बछिया देती है और आपको दूध भी मिलने लगता है। कुछ दिन बाद आपकी गाय फिर से गर्भधारण करती है। आपकी स्थिति सुधरने लगती है। आपके बच्चे स्कूल जाने लगते हैं।

फिर आपके बच्चे के दोस्त के बाप को आपके बारे में पता चलता है। वो आपसे बात करने आता है। आप उसको भोजन कराते हैं तब वो बीफ़ की माँग करता है। आप कहते हैं कि आप बाजार से मँगवा सकते हैं, तो वो जिद पर अड़ जाता है कि नई बछिया को काट दिया जाय।

आप उसे समझाने की कोशिश करते हैं कि ये संभव नहीं है क्योंकि आप उसे पाल रहे हैं। वो आपको बेमतलब का ज्ञान देने लगता है। आप फिर अपने एक दोस्त को फोन करते हैं। फिर आप अपने मेहमान को बाड़े में ले जाते हैं जहाँ गायें रहती है। आप उसे चालाकी से एक खूँटे में बाँध देते हैं और एक स्पेयर खूँटा, जो छत में अटकाया हुआ है, उससे उसकी पिटाई करते हैं।

फिर वो बंदा बाहर जाकर आपके बारे में अफवाह फैलाता है कि आप गोमाँस का धंधा करते हैं। ये जानकर कुछ लोग अपने हिन्दू होने का दावा करते हुए, और हिन्दू धर्म को बचाने का दायित्व लिए, आपके घर की चारदिवारी के पास धावा बोल देते हैं। हलाँकि आप गोमाँस का धंधा नहीं करते लेकिन आपके पास बंदूक है।

आप बंदूक लिए बाहर निकलते हैं, और कहते हैं कि हाँ, आप गोमांस का धंधा करते हैं, और करते रहेंगे। भीड़ को गुस्सा आता है, वो सब भगवा झंडा लेकर आंदोलन करने लगते हैं। फिर आप हवा में दो फायर करते हैं, और भीड़ की फट के फ्लावर हो जाती है। फर्जी के गोरक्षक भाग जाते हैं। आप घर आते हैं और अपनी गैया को चूम लेते हैं। बछिया भी जिद करने लगती है, तो आप उसे भी चूम लेते हैं। बछिया आपके चूमने का जवाब आपके चेहरे को अपनी खुरदरी जीभ से चाट कर देती है।

फिर आप गाय का दूध निकालते हैं और कॉफी बनाकर पीते हैं। आपको देश की कानून व्यवस्था में विश्वास है और आपको पता है कि थोड़ा अड़ जाने पर फर्जी के गोरक्षक कुछ नहीं कर सकते। और हाँ, आपको ये खबर भी मिलती है कि आपके मेहमान को गोरक्षकों ने जमकर पीटा क्योंकि जाते वक्त आपको गायों को चूमते हुए उन्होंने देखा था।

फ़ासिज़्म

आपके पास दो गायें हैं। आप दूध निकाल कर, ब्रीडिंग कराकर अपना घर चला रहे हैं। लेकिन अब सरकार ने घोषणा कर दी है कि गाय देश का राष्ट्रीय पशु है और आज से उसका सारा दूध बछिया पीएगी तथा गायों को, आपकी इच्छा हो या ना हो, माता मानकर पूजना होगा। आपके पास दो गायों को पालने के लिए पैसे नहीं हैं, तो आप एक गाय स्वतंत्र चरने के लिए छोड़ देते हैं।

ये गाय सड़कों पर भटकती रहती है, पॉलिथिन खाती है, इधर-उधर गोबर करती है। गोरक्षक टहलते रहते हैं लेकिन इस गाय को कहीं भी लेकर नहीं जाते। फिर एक दिन ये गाय मर जाती है और सड़क पर दुर्गंध ना फैले, इस कारण कोई आदमी इसे ट्रक पर लाद कर ले जाने लगता है। फिर इस ट्रक को एक सुनसान जगह पर गोरक्षकों की ताश खेलती, चखना चबाती एक मंडली रोक लेती है। ड्राइवर को उतार कर बेरहमी से पीटा जाता है। गाय ट्रक में लदी रहती है।

मौका देखकर एक आदमी शहर में दंगो का हल्ला उड़ा देता है और ट्रक से गाय चुराकर मंदिरों में फेंक आता है। बचे हुए टुकड़ों से बीफ़ ईटिंग फेस्टिवल कराता है क्योंकि पढ़े लिखे बुद्धिजीवियों के अनुसार गाय का माँस खाना ही असली देशसेवा है और इससे माइनॉरिटी के बीच का डर अचानक गायब हो जाता है। चूँकि दंगा फैल चुका है तो दंगे की बात फैलाने वाला आदमी आपकी एक गाय, जो आपने अपने पास रखी थी, उसे खोल कर ले जाता है।

आप पुलिस को बुलाते हैं तो वो कहती है कि सरकार अपनी इमेज बचाने में लगी हुई है और आपकी मदद नहीं कर पाएगी। वो आदमी आपकी गाय को अपने घर में छुपाकर बाँध लेता है। फिर रात में आलाकमान के लोग आते हैं और सुझाव देते हैं कि उन्हें दंगे का फायदा उठाकर शहर की सारी गायें खोल लेनी चाहिए। ये काम दो रातों में विश्विद्यालय से बुलाए हुए वामपंथी बुजुर्ग छात्रों के नेतृत्व में फर्स्ट ईयर के नौनिहाल कर डालते हैं।

जब तक दंगा शांत होता है एक ठीक-ठाक साइज की डेयरी खुल जाती है जिसका नाम है सर्वहारा डेयरी। फिर ये डेयरी दस बारह गार्ड रख लेती है और आम आदमी को मनमाने दाम पर दूध बेचती है। विज्ञापनों द्वारा ये बताया जाता है कि गाय के दूध में दैवी शक्ति है और सर्वहारा डेयरी पैसे तो बस गाय के चारा आदि के लिए लेती है।

डेयरी वाला पैसों के बल पर स्कूल में शिक्षकों की भर्तियाँ करा लेता है, पत्रकारों से गाँठ जोड़ लेता है और इलाके का सबसे बड़ कम्यूनिस्ट हो जाता है। चुनावों में वो गरीबों की बात करता है और बाहर सिर्फ बीड़ी ही पीता है। घर के अंदर मार्लबोरो या फिर मालाना क्रीम का सेवन करता है। उसका बेटा सेनफ्राँसिस्को में पढता है। गाँव में सरकार के आतंक के नाम पर वो बहुत बड़ी भीड़ अपने पीछे कर लेता है और उनको कम्यूनिस्ट मेनिफेस्टो याद करवा देता है। गाँव में बलात्कार आम हो जाते हैं, लेकिन लड़कियों को कहा जाता है कि देह तो क्षणभंगुर है, और वो कम्यून की संपत्ति है।

गीता का ज्ञान देते हुए कि हमारा कुछ भी नहीं, उन्हें सेक्स के चंगुल में फँसाया जाता है। सराकार के नुमाइंदे जब इधर आते हैं तो उन्हें घेरकर बमों से उड़ा दिया जाता है।

अंततः एक गाय, जो सबसे पहली थी, वो एक दिन बाड़े से बच निकलती है और पुल से कूद कर आत्महत्या कर लेती है।

कूल डूडिज़्म

आपके घर पर दो गायें हैं। आपके माता-पिता उसकी देखरेख करते हैं और आपका खर्चा उठाते हैं। बट यू डोन्ट गिव अ शिट् एण्ड लिव यॉर लाइफ़ ‘माह लाइफ, माह रूल्ज़’ स्टाइल।

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